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मैं बालक तू माता शेरां वालिए

तो क्या जो ये, पीड़ा का पर्वत,

रास्ता रोक के खड़ा है।

तेरी ममता, जिसका बल वो,

कब दुनिया से डरा है।

हिम्मत मैं क्यों हारूं मैया,

हिम्मत मैं क्यों हारूं मैया,

सर पे हाथ तेरा है।

तेरी लगन में मगन मैं नाचूं,

गाऊं तेरा जगराता।


मैं बालक तू माता शेरां वालिए,

है अटूट यह नाता शेरां वालिए।

शेरां वालिए माँ, पहाड़ा वालिए माँ,

मेहरा वालिए माँ, ज्योतां वालिए माँ।


तेरी ममता मिली है मुझको, तेरा प्यार मिला है,

तेरे आँचल की छाया में मन का फूल खिला है।

तुने बुद्धि, तुने साहस, तुने ज्ञान दिया,

मस्तक ऊँचा करके जीने के वरदान दिया माँ।

तू है भाग्य विधाता, मैं बालक तू माता शेरां वालिए।


जब से दो नैनो में तेरी पावन ज्योत समायी,

मंदिर मंदिर तेरी मूरत देने लगी दिखाई।

ऊँचे पर्वत पर मैंने भी डाल दिया है डेरा,

निस दिन करे जो तेरी सेवा, मैं वो दास हूँ तेरा।

रहूँ तेरे गुण गाता, मैं बालक तू माता शेरां वालिए।


मैं बालक तू माता शेरां वालिए,

है अटूट यह नाता शेरां वालिए।

शेरां वालिए माँ, पहाड़ा वालिए माँ,

मेहरा वालिए माँ, ज्योतां वालिए माँ।

मैं बालक तू माता शेरां वालिए
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