खड्गं चक्र गदेऽशु चाप परिघं शूलं भुशुण्डीं शिरः
शंखं सन्दधतीं करे त्रिनयनां सर्वाङ्गभूषावृताम्।
जय माँ काली — जान चाहे लेनी पड़े,
जान चाहे देनी पड़े, बली हम चढ़ाएंगे।
जय काली — नाश दुष्ट का करने वाली,
जय काली — नाश दुष्ट का करने वाली।
जय माँ काली — जान चाहे देनी पड़े,
बली हम चढ़ाएंगे।
क्रोधित जब हो, कपे दुनिया —
खुश हो तो पल में दिन फेरे।
पालनहारी, प्रलयानाहरी,
सब कुछ माँ, हाथों में तेरे।
नीलाश्मद्युति मस्य पदादशकं सेवे महाकालिकाम्।
यामस्तायते स्वपिते हरौ कमलजो हन्तुं मधुं कैटभम्॥
सारे जग में है कौन ऐसा —
आगे तेरे सर जो उठाये।
कट जाते हैं वह सर एक दिन —
अभिमान जिनमें आ जाये।
प्रणता नाम प्रसिद्ध्यका —
मां देवि विश्वता हरिणीम्।
त्रैलोक्यवासिनीं — लोकनाम वरदा भव।
जय माँ काली।